(1)

छोर्‌यां नै
बडेरा मिनखां
अर दादी री सीख—
हंसणौ-कूदणौ
अर जोर सूं
बोलणो मना है
क्यूं कै बै छोर्‌यां है।

(2)

गांव री छोर्‌यां
थापै है पोठा
चरावै बकर्‌यां
अर पढणै रै
भिजोक मांय
बणावै रोट्यां
चूल्लै री आंच सूं।
न उळावो
न विरोध
क्यूं कै बै
छोर्‌यां है।

(3)

बालिका शिक्षा री
रैली मांय गूंज—
''छोर्‌यां नै पढणौ है
आगै बढणौ है।''
स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : श्याम महर्षि ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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