उण बिरती नै प्रणाम
जिणसूं
आज भी
चांद ताणी
पूगतां थकां
लुगायां
चौथ रै
चांद नै
ओजूं ई
अरग देवै
पूजै
अर, आसीस लेवै।
स्रोत
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पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थानी मासिक)
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सिरजक : श्याम महर्षि
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संपादक : पदम मेहता
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प्रकाशक : माणक प्रकाशन
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- संस्करण : फरवरी 1986