सुळझ्योड़ा सपनां, अण बोली अण चींती उळझ्योड़ी बात,

अणगूंथ्या दिन अगवाणी में, हारी थकी जाग्योड़ी रात।

नैण सीपड़्यां में मोती सा आंसू है उजळा-धोळा,

होठां पर गीतां का मेळा, पलकां पर सुख-समढ़ोला,

आंसू का समदर में ऊठी ल्हैरां पर तार्‌योड़ी बात।

मुस्कावै होठां होठां, घूंघटियै उघड़्योड़ो चांद,

मन कै आगै हारै है तन, टूटै है बांध्योड़ो बांध,

होठां पर आई बेमौसम, मन मार्‌यां मार्‌योड़ी बात।

सांसां की शैनाई मीठी, कंठा की कोयल का गीत,

अधरां कै आंगण बैठी, बणी-ठणी हिवड़ै की प्रीत,

बांच सकै तो बांच म्हावळा अधरां पै मांड्योड़ी बात।

आंख्यां रातीजगो जगारी, गीत-गुवाड़ी महकी है,

थारै आवण की सुणतां ई, पग पायलड़ी बहकी है,

भुजबंधां में बांध बसास्यूं हाथां में राच्योड़ी बात।

म्हे तो गैल चांदणी सूं ई, अणथक धोणी चावै था,

पलकां सूं बुहार सांसां की गन्ध बिछाणी चावै था,

पण गेलां में बिछा गया कुण घिरणा सूं हार्‌योड़ी बात।

मेघदूत बणज्यै, बिरहण का होठां पर लिखजे रे गीत,

अब तो परणीजै रे कान्हा, राधा की अण ब्याही प्रीत,

बांचीजे मीरां का मन की भजनां में उमर्‌योड़ी बात।

आ, थारा पगल्या म्हे धोवां उजळ चांदणी सूं मिजमान,

धुपवावां आंख्यां उजास सूं तूं उजळाजै रे दिनमान,

छळकाजे रस-कळस युगां का अधरां पै दाज्योड़ी बात।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : चंद्र कुमार सुकुमार ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 15
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