गांव रै उतरादै
टीबै माथै
गवाड़ी री बाखळ में
बो
चालै गुडाळियां
अर निरखै
असवाड़ै पसवाड़ै रै
रूंखां माथै
चींचाट करती
चिड़कल्यां अर
कांव-कांव करता
कागलां नै।
बो बाजरी पीसती
मां री चाकी सूं
आटै री लप्प भर
अर होकड़ो
बण ज्यावै।
पीवै मतै ई
लोटै रो पांणी
अर मूंदौ
न्हांख देवै
क्यूं कै बो
नीं जाणैं
आच्छै माड़ै रो
फरक।
साळ रै
बारै पड़्या
गळगचियां नै
घालै मूण्डै में
बो पवनसुत दांई।
कदै मिनकी रो
पकड़ै पूंछ
कदै मरोड़ै कान
कुतिये रा
अर खिल-खिल हँसै
ताळी बजा’र।