मौन जद ठैरै है
जुग बण जावै है।
अतीत रा सबद अनै अरथ
जम जावै है
बरफ री नांई
वर्तमान में।
हिवड़ो खोल’र के लेवणो
अनै सांस रोक’र सुण लेवणो
अेक सौनाळै जुग री नांई
व्है जावै है अतीत।
अर वर्तमान
अगम मरूधर री
तपती बाळू रेत जिस्यो जीवन
बण जावै है
नगन सत्य।
मिनख रो गणित बी
अजीब होवै है
अठै दो अर दो
चार नी, छः भी व्है सकै है
अर तीन बी।
इस्यां में
मोटी-मोटी पोथियां रचणिया हाथ
गूढ़-गहन विसयां पर बोलणियो मूण्डो
व्है जावै है
अवश विकल निरुपाय
नेह रा दो बोल
कै, सुण लेवण नै।