बो अणूतो

उदास निजर आयो

जाणै जिन्दगाणी रो

दाव हार आयो

बोल्यो— 'यार

आत्म हत्या करणै रो

मूड बण रियो है—

चळू भर पाणी में

डूब मरणै रो जी कर रियो है'

भायलै पूछयो— 'भाया म्हारा!

आखी जिन्दगाणी में पैली बार

सुभ काम थूं क्यूं कर रियो है?'

'इण खातर कै— म्हांरै चुणियोड़ै प्रतिनिधि

म्हांरी नाक कटवादी

म्हांरै छेत्र री स्सा

आन-बान-स्यान घटवादी

म्हांरी इज्जत रै

आंच लगवादी

म्हानै काळी धार डुबो दिया

जनता रै विस्वास में

छुरा भोंक दिया

म्हानैं मूंडो देखाण जोग नीं राख्या

सरम सूं म्हांनै पताळ पोंचा नाख्या'

भायलै पूछयो 'इसौ अजूबो कांई कर नाख्यो?'

बोल्यो— 'अजूबो कांई कर नाख्यो!

अरे! पूछ कांई नीं कर नाख्यो?'

म्हां उणनै चुण्यो कै

बो इसौ जोरदार घोटाळो कर जासी कै

म्हांरै छैत्र रो नाम

भ्रस्टाचार रै नकसै पर टॉप जासी,

पण बै तो आखै देस रो

माथो नीचो करा दियो

आभै चढ़तै देस नै

माटी में मिला दियो

अरे! घोटाळां रै इण सोनलिया जुग में

जद टटपुंजिया नेता

घोटाळां रा स्ट्रेट ड्राइव चौका लगा रैया है

जद जस पुजिया नेता

आभै छूंवता छक्का लगा रैया है

इण अेक घोटाळो भी नीं कियो

म्हांरी साख रो काळो मूंडो कियो

बो जनता खातर गद्दार निकळग्यो

क्यूंकै बो ईमानदार निकळग्यो

देस नैं दिवाळियो कैवा दियो

लोकतंतर रै कळंक लगा दियो

जग में माथो नीचो निवग्यो

नमक हराम ईमानदार निकळग्यो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : लक्ष्मीनारायण रंगा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन, पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-19
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