भूख स्यूं बांथेड़ा करतां

थकां दूजां नै

पीसा बणावण री कळा

सीखावण वाळो आदमी।

स्रोत
  • पोथी : जागती-जोत ,
  • सिरजक : श्याम महर्षि ,
  • संपादक : रामेश्वरदयाल श्रीमाली ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : फरवरी, अंक 12
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