आंगण में बाळां री फौज
अर हंसी रौ खेल,
आंख्यां ऊपर बांधौ पाटी
अर बणौ आंधळघोटौ।
अेक बाळक बीच में रैवै ऊभौ
नैणां सूं आंधौ बण’र
हाथ फैलावै,
हाथां सूं पकड़ै कान अर
च्यारूं कांनी काटै चक्कर
आयौ रे...आयौ रे...
दूजा बाळक होळै सूं
अळगा सिरकै,
धोखौ देवै।
कैवै नांव बतावौ
गलत कैयौ तौ
पा आंधळघोटौ।
धूळ उडै,
हंसी छूटै,
पगां में आवै थाकेलौ,
पण खेल री मस्ती—
नीं खरची नीं खिलोणा
मैदान री सान,
बस भरोसौ ई खेल री
पिछाण है।
आंधळघोटौ सादौ खेल है
पण औ सिखावै—
मिनख नै बिन आंख्यां
देखणौ-जाणणौ अर
उण री पदचाप नै मैसूस करणी।