जलम मरण
अर परण
विपत घण
अणभव जाणण-हारी
आखी ऊमर
तप कुन्दण बण
दमकै वृद्धा नारी।
जिण आंगण
पग धर्यो
रुणकझुण
बणी बीनणी प्यारी।
उण आंगण
निज बेलड़ काचर
दादी कैय पुकारी।
कामण
गज-गामण
आंगण बिच
कदम्ब गाछ
ज्यूं डोली।
अब डोलै नस
आंख न सूझै
अटकै-टूटै बोली।
दन्तबिहूणो
मुख धोळो सिर
झुकी कमर है सारी।
टूरै आंगणै
लियां गेडियो
(म्हारै) बाबै री महतारी।
हाथ-पगां रो
लटक्यो चामड़
मुख में जीभ फिरावै
टाबर-टोळी
बीच डोकरी
बैठ घणो सुख पावै।
छठै चौमासै
बेटा-पोता
तबियत पूछै सारी
आखी ऊमर
तप
कुन्दण बण
दमकै
वृद्धा नारी
लकड़ियां
जीरवाण बिच पूगी
तोई न चिन्ता छोडै।
घर में—
तनिक व्यवस्था बिगड़ियां
छाती-माथा फोड़ै
डरै—
लुगायां
लुके रसोई
दादी साम्हीं न आवै
बात करै—
निज मिनखां संग जद
धीमी-सी बतळावै
टाबर-टोळी
कर गळती झट
दादी नैड़ा जावै
अभय-कोट
दादी रो खोळो
(बठै)
कोई न हाथ लगावै।
हारी-बेमारी
कोई मांदगी
घर में किणनै ई आवै
खाण-पाण तज
करै चाकरी
दादी मर-मर जावै।
देख
अणमणो
किणो सदस्य नै
होवै बडी दुखारी
आखी ऊमर
तप
कुन्दण बण
दमकै
वृद्धा नारी
सिरजणहारै री
मन-सौरम
जग सिरजण
जग आई
नर कारण
त्यागै जणणी घर
बणै पराई जाई
आयै दिन
करड़ी अबखायां
दुरगत गळै लगावै
भ्रष्ट-बुद्धि
नर नै
केवट लै
आप घणो दुख पावै।
बणी—
बूढकी आज
काल तक ही
इण घर री राणी
कर्यो—
सांवठो करड़ो अणभव
भाप, बरफ, बण पाणी
नर रा—
नखरा भांत-भांत
रिस्तां मिस
झेलण आळी
बाप—
भाई, बेटा, प्रियतम भल
केवटलै चरिताळी
ताजिंदगानी
जगै जोत बण
नर-हित नित बलिहारी
आखी ऊमर
तप
कुन्दण बण
दमकै
वृद्धा नारी
बण्यां
स्वयम्भू नर
रच बन्धण
थन्नै नाच नचावै
नर बांधै
थूं
बंधै पशु ज्यूं
नीरै सोई खावै।
जीवण-धण थूं
नर-हित कारण
कष्ट उठावै भारी
इण
धरती पर
सबसूं सैंठी
थारी गाथा न्यारी।
जिनगाणी रै
सही बोध री
सांची सौरम क्यारी
नारी
नर नै जण
दासी बण
जीवण काटण हारी।
जलम
मरण अर परण
विपत घण
अणभव जाणण हारी
आखी ऊमर
तप
कुन्दण बण
दमकै
वृद्धा नारी।