बजार पांगळो है,
जाबक लंगड़ो..
आपरी ठौड़ सूं अेक पांवडो ही सरकै नी।
दुकानदार बहरो है,
असराळ गूंगो..
हेलाहेल कानां ढोळै हीज नी।
रूखाळो अन्याई है
अर है लपरो
लोग दिखाऊ रा बांस पटकै है लेधे पड़्यो,
घाल राखी है टाटा नै बाड़ै में
पटकै है गेडियो गुवाळियै दांईं
मजै री बात!
फळसो सबड़क जड़्योड़ो है,
कैण ही कैयो..
खोल द्यूं टाटो
बोल्यो..
अरै! गतबायरा!
खोल मतराळी
टुर ब्हीर हुवैली टाटां
जोगी री जूनी गूदड़ी रा ढेरा ज्यूं।
ओ है अेक विरोधाभास।
जद ओ बापड़ो सूरज
कद ऊगै कद बिसूंजै
ओ तो थिर रो थिर हीज रैवै।
जद आपां
तावड़ियो जीमां
अर पौन पीवां
धापो तो धरती री थाळी में..
छायां सूं चळू करो।
लाई लागै नीं चिरमिराट,
तो थे चिड़ी सिनान करो।