जकै मिनख मांय हुवै आस

बो मिनख ही हुवै है कीं खास

आस पर ही तो दूनिया टिकी

बिना आस रै दूनिया फिकी

आस ही है जीवण रो नाम

आस पर ही टिक्या है सै काम

आस सूं ही चालै सांस

आस सूं ही हुवै जींदगी री परीक्षा पास।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : पृथ्वीराज चौहान ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
जुड़्योड़ा विसै