आपरी ‘हां’ सारै
म्हैं इण संसार नै मार दियौ
कुळ, लाज-सरम, डर-भौ—
सगळौ विसार दियौ।
सगळौ आपौ मेट दियौ म्हैं म्हारौ...
म्हारा सायब!
थे ‘ना’ मती दीजौ
आपरी ‘हां’ लारै ई म्हारौ संसार है
‘ना’ कैवतां ई मसाण।
म्हनै आ ओळख मत दीजौ
म्हनै ‘ना’ मत दीजौ
बेमौत ई म्हनै मत मारजौ
उठै अधबेई रा समदर अपार है
आपरी ‘हां’ लारै
म्हारौ संसार है।