आंख्यां सूं झर-झर झरता

आंसूड़ा ढळकता रिया

काळजा रो कळपणो

मन रो खार

आंख्यां री कोर सूं

सावण-भादवा री

बरखा कर अर

रेळम-पेळ करतो बहावणो।

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : वासुदेव चतुर्वेदी ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
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