राजस्थांन रौ समूचौ विकास ई म्हारौ संकलप : माथुर

 

 

शिवचरण माथुर : म्हनै लागौ के म्हारै सांमी अेक मोटौ अर ‘चैलैजिंग’ कांम आयौ। मंत्री बणबौ या मुख्यमंत्री बणबौ, नीं म्हारै वास्तै नवी बात ही, अर नीं अणूतै नादीद अर कोड री बात। सो वैड़ौ नादीदै वाळौ ‘चार्म’ तौ हौ कोनी, पण इतरौ जरूर है के अेक मोटी अर महताऊ जिम्मैवारी म्हारै खांधै आई, म्हारी पूरी चेस्टा या ई रैसी के म्हैं मुख्यमंत्री रो पद संभाळ’र राजस्थांन रै वास्तै कीं कर सकूं। म्हैं अबार री घड़ी मुख्य मंत्री रै पद नै अेक मोटी चुनौती रौ कांम मान’र मंजूर कीधौ हूं, अर म्हारी मनस्या है के सब लोगां रै सहयोग सूं राजस्थांन रौ ढब-ढाळौ कीं सुधार सकूं, इण नै कीं बणाय सकूं, इण सारु आ 'बणबौ' अपणै आप में तौ कोई मोटी बात कोनी।

 

तेजसिंघ जोधा : मंत्रीमंडळ बणावतां आप कुण-कुण सी बातां रौ खास तौर सूं ध्यांन राख्यौ?

 

शिवचरण माथुर : म्हारै नजदीक सब सूं मोटो विचार तो औ ई रह्यौ के फंग्सनल गवरमेंट, अेक कांम करण वाळी सरकार बणाऊं। इणीं वास्तै आप देखस्यो के म्हैं किणीं भांत री स्टेजेज, स्टालमेंट के किस्तां में मंत्रीमंडळ रो निरमांण कोनीं करियौ। अेक ई वार में मंत्रीमंडळ बणाय लीधौ। सोच लियौ के भाई असल बात तौ कांम करणौ है। अर कांम करवां सारू अेक आछी सी ‘वाइबल अर साइजेबल’ टीम बणावणी पड़सी, सो बणाय ली। फालतू री बातां नै सोची कोनी। न्यारा-न्यारा कामां रै बंटवाड़ै नै देखता थकां 19-20 लोगां री जरूत लागी, सो अेक ई वार में वां नै बतळाय’र मंत्रीमंडळ बणाय लीन्हौ।

 

तेजसिंघ जोधा : राजस्थांन रै विकास सारू आप कांईं सोचौ?

 

शिवचरण माथुर  : यूं तौ करस्यां जितरा ई कांम। पण कीं कामां रै वास्तै म्हैं खास तौर सूं चेस्टा करस्यूं। अेक तौ ज्यूं-त्यूं 4 बरसां में राजस्थांन नहर नै पूरी करावा री सोचूं।

 

हिमालय रै जळ में राजस्थांन रौ जिकौ हिस्सौ बणै, वौ कायदै सूं राजस्थांन नै हाथै आवै, इण बात री चेस्टा म्हारी रैसी।

 

म्हे नैड़ै ई दिनां अेक सत्ताईस सूत्री संकळप सरकारी सत्र माथै लेवण री सोचां।  इण संकळप रै मुजब इणी साल पंचायतां, जिला-परिसदां अर सहकारी संस्थावां रा चुणाव कराय देस्यां। हरेक पंचायत में अेक टाळवे नमूनै री स्कूल बणावा रो ई विचार है। देहाती हलकां में 30 हजार रै अंदाजै, अर नगरी-हलकां में 50 हजार रै सांकड़ा आवासी भुखण्ड ई जरूरतमंद लोगां नै दिरावण रौ जतन करस्यां। इण साल 4 हजार गांवां में पीवण रौ पांणी पुगाय देस्यां।

 

सगळा पंचायत हैडक्वाटर सड़कां सूं जोड़ीज जासी। अबार तौ अै ई कीं मोटा अर खास कांम है, जिकां री तरफ म्हांरी निजर है।

 

तेजसिंघ जोधा : राजस्थांन री मौजूदा राजनीतिक हालत रै बाबत आप कांईं कहस्यौ?

 

शिवचरण माथुर :  जठै तांईं म्हारी बात है, म्हैं इन्दिराजी अर राजीव गांधी में पूरी आस्था राखूं। म्हारौ आपरौ कोई गुट कोनी। नीं जोड़-तोड़ री राजनीती में म्हारौ विसवास ई है। म्हैं तौ राज्य री जनता अर सगळां कांग्रेसजनां रै सहयोग सूं प्रांत री सेवा करणी चाऊं। अर पूरी उमीद राखूं के म्हनै सहयोग मिळसी।

 

तेजसिंघ जोधा : अब म्हैं असली बात माथै आवूं। सबसूं पैला तौ राजस्थांनी भासा रै बाबत मोटै-मोटै रूप सूं आपरा विचार जांणबौ चास्यूं? राजस्थांनी भासा री संवैधानिक मांनता अर स्कूलां-कॉलेजां में राजस्थांनी पढ़ावण रै बाबत आप कांईं विचार राखौ?

 

शिवचरण माथुर : जठै तांईं राजस्थांनी भासा नै मांन अर मैतव देवा री बात है, इण में तौ दो राय नीं व्है सकै के राजस्थांनी आपणी भासा है, आपणै प्रांत री भासा है, इण वास्तै इण नै मांन अर मैतव तौ पूरौ-पूरौ दियौ जावणौ चाहिजै ई, इण नै विकास रा औसर ई आछी तरियां मिलणा चाहिजै।

 

पण सबसूं पैली बात इणरौ सरूप बणावण री है। आपां नै इण रौ सरूप तै करणौ पड़सी। इण मामलै में न्यारी-न्यारी राय व्है सकै, पण अेकर इणरौ सामान्य रूप बणियां पछै ई बढ़ावण री बात व्है सकै।

 

तेजसिंघ जोधा : सरूप रै तालकै म्हारौ निवेदन है के किणीं भासा रौ सरूप पैला सूं ईं तौ बणियोड़ौ व्है नीं, किणीं भासा नै पढ़ाई लिखाई में आवण रौ मौकौ मिळै, जद ई तौ उण रौ सरूप ढळै। आज सूं 60 बरस पैली री हिंदी नै ई लिरावौ, तौ वौ अेक सरूप कठै? वरतनी अर सबद-रूपां रा केई फरक हाल ई हिंदी में दीखै? फेर राजस्थांनी तौ...

 

शिवचरण माथुर : नीं, नीं, वीयां तौ म्हैं मानूं के राजस्थांनी समरथ भासा है। उण में जिका सबद है, वै घणा  ‘मिनिंग फुल’ है। उण रै अेक-अेक सबद में इतरौ अरथ छुपियोड़ौ होवै के दूजी भासा रा च्यार-च्यार सबद लेवां, तौ ई वा बात पैदा कोनी व्है। राजस्थांनी में वौ जिकौ सबद कोस बणायौ हौ नीं, सीतारांम जी लाळस! बौत बढ़िया कांम है। म्हैं तौ उण बगत सिक्षा मंत्री हौ, वां नै म्हारी तरफ सूं खूब प्रोत्साहन दियौ। अेक अकेली भासा में इतरा सांवठा सबद भेळा करियोड़ा म्हैं कदै ई कोनी देख्या। अंगरेजी में ईं कोनी देख्या। वै ई फेर ‘मिनिंग फुल’, ‘टू द पोइंट’, सीधा बात नै ‘हिंट’ करता थका। राजस्थांनी रौ तौ अेक ई सबद आपनै पूरौ जबाब देय देवै।

 

तेजसिंघ जोधा : आपरी जांणकारी वास्तै अरज करूं के सन् 74 सूं राजस्थांन रै माध्यामिक शिक्षा बोर्ड री स्कूलां में राजस्थांनी साहित्य नवीं, दसवीं अर ग्यारवीं स्तर माथै अेक आफनल सबजेक्ट री गळाई पढ़ायौ जावै। पण आगै जोधपुर विस्वविद्यालै नै छोड़’र राजस्थांन विस्वविद्यालै (जिणरौ पाठ्यकम राजस्थांन री सगळी कॉलेजां में चालै) रा सगळा कॉलेजां में इण विसै नै पढ़ण-पढ़ावण रौ बंदोबस्त कोनीं, इण वास्तै भणण वाळा नै निरास होवणौ पड़ै, अर इणरौ असर नवा लड़कां माथै ई आवै।

 

शिवचरण माथुर : म्हैं अैग्जामिन करवास्यूं अर आछी तरै सूं अतौ-पतौ करस्यां के अब तांईं राजस्थांनी भासा पढ़ावण नै जिकी सुविधावां दिरीजी, वै कैड़ी ही, पढ़ावण रौ कैड़ौ बंदोबस्त हौ। इण री जांच-पड़ताळ करियां पछै, अर औ देख्यां पछै के उणरौ कैड़ौ असर पड़ियौ, म्हैं राजस्थांनी भासा नै हर स्तर माथै बढ़ावौ देवण री बात में विसवास राखूं।

 

तेजसिंघ जोधा :  म्हांरी तौ आपसूं आई अरज है, अर म्हे औ ई विसवास राखां के आप स्कूलां अर कॉलेजां में राजस्थांनी विसय कायदै सूं सरू करावा रै कांम में व्यक्तिगत रूप सूं रूची लिरावौगा।

 

शिवचरण माथुर : निस्चित रूप सूं ल्यांगा। आप इण बात सूं ईं अंदाज लगाय सकौ के म्हैं सिक्षा सूं टाळ’र अेक नवौ विभाग कायम करियौ—कला, संस्क्रती अर पुरातत्व।

 

राजस्थांन री कला अर संस्क्रती जूनै जमांनै सूं चालती आई, अर उणरौ आपरौ अेक इतिहास है। जिकौ नीं कोरौ भारत में ईं, अपरंच आखी दुनियां में आपरौ न्यारौ-निरवाळौ स्थांन राखै। अठै रा ‘फोक डांस’ अर ‘फोक आर्ट’ री अेक न्यारी पिछांण है।

 

अब तांई औ सब सिक्षा विभाग रै साथै हौ, सिक्षा विभाग रौ अेक पार्ट हौ। मतलब सिक्षा मंत्री जितरौ ध्यांन दे देतौ, बस उतरौ ध्यांन दे देतौ, उणनै अेक ‘अैमफेसिस’ देवण नै, अलग सूं अेक वजन देवण नै अेक अलग विभाग बणायौ मतलब औई है के डाइरैक्ट ‘अैमफेसिस’ होवै, सीधौ ध्यांन दियौ जावै।

 

म्हे इण विभाग नै परजटण रै साथै जोड़ियौ हां, क्यूं के परजटण इण रै सायै वीयां ईं ‘लिंक्ड’ है।

 

तेजसिंघ जोधा : पण इणमै परजटण रै साथै जोड़वा रौ अेक खतरौ म्हनै लागै। कठैई औ विभाग कोरौ परजटकां रै वास्तै ई कला अर संस्कती नै सुलभ करवा रौ कांम तौ नीं करसी?

 

शिवचरण माथुर :  नीं, औ चौ प्रसासनिक सोराई रै वास्तै ई उण आदमी नै दिरीजियौ है, जिणरै कनै ‘टूरिज़्म’ है, वौ इण वास्तै कला, संस्कती अर टूरिज़्म रै कांम रै संभाळै, जिण सूं के आं दोनूं कामां रै बिचै अेक लाजमी ‘कारडीनेसन’ रैवै। बारै सूं जिका लोग आवै, वांरौ ‘इंट्रेस्ट’ मोटा-मोटा ‘पॉस होटल्स’ में को नी होवै, पण ‘केसल्स’ में होवै! राजस्थांन री पुरांणी सूं पुरांणी अर छोटी सूं छोटी चीज में वांरी ‘इंट्रेस्ट’ होवै। लोक कला में वांरौ ‘इंट्रेस्ट’ होवै। इण निजर सूं इणनै परजटण रै साथै राख्यौ, दूजी कोई बात कोनी।

 

लक्ष्मीकुमारी चूंडावत :  इण मुतालिक म्हारै मन में अेक विचार है के अबार जिकौ राजस्थांनी साहित्य अकादमी रौ प्रस्ताव है, अर जिकौ आपरै कनै मंजूरी वास्तै आसी, उणरौ नांव राजस्थांनी साहित्य अर संस्कती अकादमी राख्यौ जावै, जिणसूं के आपां जन-सहयोग ई लेय सकस्यां अर...

 

शिवचरण माथुर : लक्ष्मी जी, आपरौ वाचर बढ़िया है, म्हनै पसंद आयौ।

 

लक्ष्मीकुमारी चूंडावत : हवा म्हैल जैड़ी बिल्डिंग में इण रौ दफ्तर व्हैणौ चईजै। हवाम्हैल तौ इण सारू के वौ राजस्थांन रौ प्रतीक बणियौ थकौ है। इण अकादमी में अेक लोक कला संग्रहालय ई खुलै। जे सस्थावां अर असरदार लोगां सूं सहयोग मांग्यौ जासी, तौ दो-दो तीन तीन चीजां करता थकां ईं घणी चीजां भेळी व्है जासी अर सरकार नै ई जोर कोनी आसी।

 

शिवचरण माथुर : जरूर, जरूर,  अैड़ौ कांम तौ जरूर बढ़ायौ जावणौ चाहिजै। उदैपुर रै लोक कळा मंडळ नै तौ आप जांणौ ई हौ। वा असल में बौत बढ़िया सेवा कीधी है, ‘फोक आर्ट’ अर ‘फोक म्यूजिक’ री। जिकी चीजां दबगी ही, खतम व्हैगी ही, वां नै पाछी मुंडागै लाया।

 

तेजसिंघ जोधा : माणक आप देखी होसी? कैड़ी कांई लागी?

 

शिवचरण माथुर : हां आपरी इण पत्रिका रा अंक म्हैं पैला ई केई बार देख्या। राजस्थांनी भासा रै वास्तै बढ़िया कांम होयौ। म्हनै आ पत्रिका घणी दाय लागी अर म्हैं इण री सफळता चावूं।

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थांनी मासिक) ,
  • सिरजक : शिवचरण माथुर सूं तेजसिंघ जोधा री बंतळ ,
  • संपादक : तेजसिंघ जोधा ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन ,
  • संस्करण : सितम्बर 1981
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