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कला पर बंतळ

कला मिनख जूण रै इतियास

सागै राती-माती व्हैती आयी है। कोसगत कला रा जिका अर्थ दीरीज्या है उणमें एक अर्थ खुद नै अभिव्यक्त करणौ ई है। अठै प्रस्तुत कवितावां कला रै ओळै-दोळै रचियोड़ी है।

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बंतळ1

मोहम्मद असग़र उस्ता सूं इसरारहसन री बंतळ

ऊंट री खाल माथै मीनाकारी रा उस्ताद मोहम्मद असग़र उस्ता   राजस्थान री धरती सैकडूं बरसां सूं साधू-संतां, वीरां-सतियां अर कवियां-कलाकारां री रैयी है। साधू-संतां आपरी इमरत वाणी सूं लोगां नै सही रस्तौ दिखायौ, तो वीरां-सतियां इण धरती री मान-मरजाद खातर प्राण

मोहम्मद असग़र उस्ता

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