कला पर लेख
कला मिनख जूण रै इतियास
सागै राती-माती व्हैती आयी है। कोसगत कला रा जिका अर्थ दीरीज्या है उणमें एक अर्थ खुद नै अभिव्यक्त करणौ ई है। अठै प्रस्तुत कवितावां कला रै ओळै-दोळै रचियोड़ी है।
सागै राती-माती व्हैती आयी है। कोसगत कला रा जिका अर्थ दीरीज्या है उणमें एक अर्थ खुद नै अभिव्यक्त करणौ ई है। अठै प्रस्तुत कवितावां कला रै ओळै-दोळै रचियोड़ी है।
च्यारूं मेर मखमली बेकळू रेत रौ पसराव। राजस्थान में जैसलमेर रै बाद रेत रै टीबां रै फिलमांकन रौ दूसरौ खास मुकाम श्रीडूंगरगढ चूरू जिलै रौ अेक कस्बौ। ठीक वां ई दिनां, जदकै मृणाल सेन फ्रांस रै सैयोग सूं जैसलमेर रै कुलधारा गांव में आपरै लाव-लश्कर रै साथै ‘जेनेसिस’