राणी लक्ष्मीकुमारी चूंडावत राजस्थानी साहित्य रौ ठावकौ अर ख्यात नांव। सन् 1916 में देवगढ़ (उदयपुर) में जनम्या राणीजी साहित्य अर राजनीत दोनूं ठौड़ां राजस्थानी नारी चेतना अर ओळख रै महताऊ पखां माथै समाज नैं चेतावता थकां जोरदार दखल दीवी। फ्रांसिस टैफ्ट रै कैवणै ‘फ्रॉम परदा टू द पीपल’ मुजब वै सामंती परिवेस सूं बारै निसर’र लोक सूं जुड़िया। राजनीत में आय’र तीन दफै विधावसभा चुनाव ‘भीम’ क्षेत्र सूं जीत्या। राज्यसभा में 1972-78 तांई रैया। आप राजस्थानी लोककथा साहित्य री आपरी निकेवळी कलम री कोरणी सूं आखै जगत में ठावी ठौड़ थरपाई। अठै प्रस्तुत है राणीजी सूं लिरीज्यै साक्षात्कार रा कीं अंश। ओ साक्षात्कार कवयित्री शारदा कृष्ण, राणीजी रै जयपुर रैवास जायनै लियो। अठै प्रस्तुत है इण साक्षात्कार रा कीं अंस।

 

शारदा कृष्ण : आपरो जलम आजादी सूं पैली रै सामंती परिवेस मांय होयो। परणीज’र ई आया उणीज माहौल मांय। लिखणै, विचार प्रगटावणै अर आगीवाणी री खिमता अर प्रेरणा कद-कियां अर कठै जागी?

 

लक्ष्मी कुमारी चूंडावत : शारदाजी, मिनख रै मांयली चेतना परिवेसगत थितियां सूं ईज जुड़ी थकी होवै। साम्हीं पड़तख देखतां थकां का मांय-भीतर री चीजां नै मैसूसतां थकां भाव अर विचार जागै। दूजी बात, म्हारै आखती-पाखती म्हैं जको कीं घटयो, देख्यो, सुण्यो उणनैं लिखणै-पढणै रो म्हनैं कोड हो।

 

शारदा कृष्ण : आपरै लेखन अर सिरजण मांय दलित-शोसित अर आम आदमी री अंवेर कमती हुई है, आप कांई कैवो?

 

लक्ष्मी कुमारी चूंडावत : इण बात सूं मैं अंगैई सहमत नीं हूं। परिवेस लेखन अर विचार नैं प्रभावित करै। समाज में रैवतां थकां वीं री हलगल अछूती कियां रैय सकै। शौर्य वीरता अर प्रेमकथावां रा पात्र समाज सूं ही उठाया गया है। ‘हूकार री कलंगी’ रा माजीसा रै साथै-साथै ‘जसमा ओडण’ अर ‘ऊजळी’ रो चरित्र भी उकेरीज्यो है।

 

शारदा कृष्ण : राजस्थानी महिला लेखन रो साहित्यिक स्वरूप आपरै लोककथा-साहित्य मांय पैलपोत प्रगटयो। लोक-कथावां ‘लोक’ री है पण वांरै मूळ कथ्य अर सिल्प मांय आपरी कलम कोरणी री करामात साव निंगै आवै। इणसूं कांई ओ समझ्यो जावै कै आपरै लेखन रो कथ्य ‘लोक’ रो है अर ‘सिल्प’ आपरो?

 

लक्ष्मी कुमारी चूंडावत : जे ओ मेळ भी पाठक नैं दाय आयो है, अर म्हारो सिरजण सरावणजोग बण पड़यो है, तो इणमें दोस कांई? राजस्थानी रो लकसाहित्य अखूट है, जिणरै संकलन, संरक्षण अर अंवेर री घणी दरकार है। जे किणी लेखन मांय प्रसंगवश भी ‘लोक’ समावै तो वीं सिरजण री साख सवाई बधै अर ‘लोक’ री अंवेर भी होय जावै।

 

शारदा कृष्ण : आज रै महिला-लेखन बाबत आप कांई कैवो?

 

लक्ष्मी कुमारी चूंडावत : घणी गीरबैजोग बात है कै राजस्थानी महिला-लेखन मांय मात्रागत, गुणगत अर विधागत बधापो बरोबर होय रैयो है। म्हारी बखत कोई इक्का-दुक्का नांव इण छेत्र मांय सुणीजता हा पण अबै आपरै ‘आंगणै सूं आभो’ मांय पचासूं लघुकथा, संस्मरण, गीत, गजल, दूहा, नाटक, अनुवाद आद विधावां मांय भरपूर लिख्यो जाय रैयो है। नवी विधावां सूं ई महिला लेखिकावां नै जुड़णो चाहीजै। डायरी, रिपोर्ताज, सबदचितराम, रेखाचितराम, निबंध आद विधावां हाल अछेड़-सी है।

 

शारदा कृष्ण : राजस्थानी री मान्यता मांय आप कांई बाधा मानो?

 

लक्ष्मी कुमारी चूंडावत : राज संकळप करै तो कठैई कोई मोटी अटकावण कोनी। लोग भासा री अेकरूपता रो सवाल उठावै अर हिंदी नै खतरो बतावै, अै सै निराधार बातां है। भासा मांय बोलियां होवै ईज है। मातृभासा राष्ट्रभासा रै कठै आडी आवै? छैहली प्रांतीय भासावां सूं हिंदी रो कांई अहित होयग्यो?

 

शारदा कृष्ण : आपनै राज, समाज अर अलेखूं देसी-विदेसी संस्थावां सूं अणगिणत मान-सनमान अर पुरस्कार मिल्या है। पुरस्कार सिरजण-खिमता नै प्रभावित करै कांई?

 

लक्ष्मी कुमारी चूंडावत : प्रशंसा, सरावणा अर मान-सम्मान लेखन री गुणवत्ता रा सागी मापदंड होवै, आ जरूरी कोनी पण करयोड़ै काम री कूंत करीजै तो उछाव दुराणो जरूर होवै। म्हांरी समझ मांय कोई लेखक कदैई पुरस्कार सारू कोनी लिखै अर जे कोई लिखै तो वो खरो-साचो लेखन कोनी।

 

शारदा कृष्ण  : महिला सशक्तीकरण सूं नारी रे चित्त, चेतना अर चिंतन में निजता अर आपरै आपै री रुखाळ होयी है कांई?

 

लक्ष्मी कुमारी चूंडावत : शारदाजी, शक्ति रो कांई सशक्तीकरण होवै? नारी रै वेदां मांय निंवण करीज्यो है। म्हारै मतै ‘शक्ति’ नारी रै मांय ईज है, बारै सूं कोई दूजो किणनै सशक्त कर सकै? शक्ति जे अबला गिणीजैला तो वींरी सगळी रूखाळ कियां अर कुण कर सकै? आज नारी समाज मांय आपरी सबळी ओळखाण बणावण में बरोबर लाग्योड़ी है। वीं रा सकारात्मक परिणाम भी साम्हीं आया है, पण अजै ई हत्या, आतमहत्या, बलात्कार अर हिंसा-प्रताड़नावां रो अखबारनामो ठम्यो नीं है। समाज व्यवस्था अर कानून कठै-कठैई लाचार है अर कठै कठैई संवेदना-सरोकारां सूं साव हीण। अैड़ी अबखी वेळां नारी नैं आपरो आपो अंवेरतां थकां बरोबर जुद्धरत रैवणो पड़ैला।

 

शारदा कृष्ण : पद्मक्षी पुरस्कार समेत केई मानजोग पदवियां, पुरस्कांरा नैं अंगेजता थकां, 30-35 हिंदी-राजस्थानी पोथियां रो सिरजण करतां, राजनीत मांय उल्लेख जोग सफळता साथै तीन कम सौ बरस री इण अवस्था मांय आज आप पड़दै सूं लोक तांई री इण जीवण-जातरा माथै कांई टीप करो? आपरो पारिवारिक परिचै भी पाठकां सारू घणो जरूरी लखावै।

 

लक्ष्मी कुमारी चूंडावत  :  म्हनैं घणो अंजस है कै म्हैं परिवार, समाज अर लोक सूं जुड़ी थकी म्हारी जिम्मेवारियां नै पूरै नैहचै अर ठीमरपणै सूं निभाई। मेवाड़ रै देवगढ़ (उदयपुर) रा रावत विजयसिंहजी अर राणी नंदकंवर री तीन संतानां मांय म्हैं बडी बेटी ही। भाई संग्रामसिंह बडा अर बैन खुमाण कंवर म्हासूं छोटी है। रावतसर (बीकानेर) रा रावत तेजसिंहजी साथै सन् 1934 मांय परणीजी। दोय बेटा अर चार बेटियां है म्हांरी। बेटा बहू, बेटी-जवाईं, दोयता, पोता-पोत्यां रो भरयो-पूरो अर संस्कारित परिवार है। आं सबां साथै आज आ अवस्था घणै सुख अर संतोख सूं बीत रही है। म्हैं इणनैं परमपिता री घणमोली असीस मांनू। म्हारै करत्वय नैं दूणो चौगणो कर’र मान-सनमान साथै समाज मांय अंगेज्यो गयो, इण लेखै सबां नै घणा-घणा रंग।  

स्रोत
  • पोथी : राजस्थली ,
  • सिरजक : शारदा कृष्ण ,
  • संपादक : श्याम महर्षि ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी साहित्य-संस्कृति पीठ
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