राजस्थानी पर बंतळ
राजस्थानी में अनेक भांत रौ साहित्य रच्यौ जावै श्री लक्ष्मीकान्त व्यास : राजस्थानी भाषा री सेवा करण री बात आप कियां सोची अर इण में आपरा प्रेरणा स्रोत कुण रह्या? नानूराम संस्कर्ता : म्हैं राजस्थानी भाषा री सेवा री बात कांई सोची। खुदरी भाषा तो मां
राजस्थानी सिमरिध भासा, इणरी पूंजी अथाग अंतररास्ट्रीय ख्यातीप्राप्त गुजराती रा सिरैनाम कवि, ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ विजेता, गुजरात विद्यापीठ रा भूतपूरव उपकुळपति, केन्द्रीय साहित्य अकादेमी रा वरतमांन अध्यक्ष अर राज्यसभा रा मौजूदा सदस्य उमासंकरजी जोसी साहित्य-जगत
राणी लक्ष्मीकुमारी चूंडावत राजस्थानी साहित्य रौ ठावकौ अर ख्यात नांव। सन् 1916 में देवगढ़ (उदयपुर) में जनम्या राणीजी साहित्य अर राजनीत दोनूं ठौड़ां राजस्थानी नारी चेतना अर ओळख रै महताऊ पखां माथै समाज नैं चेतावता थकां जोरदार दखल दीवी। फ्रांसिस टैफ्ट रै