शक्तिदान कविया सूं सुखवीरसिंह गहलोत री बंतळ
भाषा रै पाण ई राजस्थानी रजवट रौ वट कायम रहसी
सुखवीरसिंह गहलोत : डिंगळ काव्य में आपरी मोकळी रुचि है। ओ शौक आपनै ठेट सूं कियां लाग्यौ?
शक्तिदान कविया : म्हारी जनम भोम बिराई कवियां री (जोधपुर सूं आथूणी छेहड़ै) ख़ासतौर सूं, डिंगळ काव्य रै हिसाब सूं ‘छोटी