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राजस्थानी पर बंतळ

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बंतळ1

शक्तिदान कविया सूं सुखवीरसिंह गहलोत री बंतळ

भाषा रै पाण ई राजस्थानी रजवट रौ वट कायम रहसी सुखवीरसिंह गहलोत : डिंगळ काव्य में आपरी मोकळी रुचि है। ओ शौक आपनै ठेट सूं कियां लाग्यौ? शक्तिदान कविया : म्हारी जनम भोम बिराई कवियां री (जोधपुर सूं आथूणी छेहड़ै) ख़ासतौर सूं, डिंगळ काव्य रै हिसाब सूं ‘छोटी

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