इतिहास पर बंतळ
घटनावां रौ कालक्रम जिकौ
बीत चुक्यौ है, समाज नै चालण में वा ठावकी भुमिका निभावै अर लगोलग चैतावै, आपां उणनै इतिहास केवां। अठै प्रस्तुत चयन इतिहास सूं जुड़ियोड़ी कवितावां रौ है।
बीत चुक्यौ है, समाज नै चालण में वा ठावकी भुमिका निभावै अर लगोलग चैतावै, आपां उणनै इतिहास केवां। अठै प्रस्तुत चयन इतिहास सूं जुड़ियोड़ी कवितावां रौ है।
राजस्थानी में अनेक भांत रौ साहित्य रच्यौ जावै श्री लक्ष्मीकान्त व्यास : राजस्थानी भाषा री सेवा करण री बात आप कियां सोची अर इण में आपरा प्रेरणा स्रोत कुण रह्या? नानूराम संस्कर्ता : म्हैं राजस्थानी भाषा री सेवा री बात कांई सोची। खुदरी भाषा तो मां
राजस्थानी सिमरिध भासा, इणरी पूंजी अथाग अंतररास्ट्रीय ख्यातीप्राप्त गुजराती रा सिरैनाम कवि, ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ विजेता, गुजरात विद्यापीठ रा भूतपूरव उपकुळपति, केन्द्रीय साहित्य अकादेमी रा वरतमांन अध्यक्ष अर राज्यसभा रा मौजूदा सदस्य उमासंकरजी जोसी
ओ धन पाछौ हाथ नीं आवणौ है श्यामसुंदर भारती : राजस्थानी साहित्य, खासकर कविता कांनी आपरी रुचि किंयां होई? नारायणसिंह : राजस्थानी साहित्य कानी म्हारी रुचि रौ सब सूं बडौ कारण राजस्थानी संस्कृति सूं म्हारौ गैरौ लगाव है। म्हांरै गांव में जिकौ सांस्कृतिक
राणी लक्ष्मीकुमारी चूंडावत राजस्थानी साहित्य रौ ठावकौ अर ख्यात नांव। सन् 1916 में देवगढ़ (उदयपुर) में जनम्या राणीजी साहित्य अर राजनीत दोनूं ठौड़ां राजस्थानी नारी चेतना अर ओळख रै महताऊ पखां माथै समाज नैं चेतावता थकां जोरदार दखल दीवी। फ्रांसिस टैफ्ट रै
भारतीय क्रिकेट रौ स्तर बढ़ रैयौ है लारलै दिनां धोरां-धरती री सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर रै उम्मेद भवन पैलेस में ग्वालियर सूटिंग रौ विज्ञापन संस्था अेम. अे.पी.पी. रै वास्तै छायांकन करण रै सिलसिलै में क्रिकेट जगत रा जगचावा खिलाड़ी अर पटौदी नवाब मंसूर अली
राजस्थांन रा राजनेता राजस्थांनी भासा सारू गहराई कदैई विचार नीं करियौ प्रहलाद जोसी : राजस्थान अेक पिछड़ियोड़ौ प्रांत गिणीजै, इणरै सरवांगीण विकास सारू आपनै किसा-किसा कांम महताऊ लागै? भैरौसिंघजी सेखावत : आ बात सही है के राजस्थान अेक पिछड़्योड़ौ