इतिहास पर लेख
घटनावां रौ कालक्रम जिकौ
बीत चुक्यौ है, समाज नै चालण में वा ठावकी भुमिका निभावै अर लगोलग चैतावै, आपां उणनै इतिहास केवां। अठै प्रस्तुत चयन इतिहास सूं जुड़ियोड़ी कवितावां रौ है।
बीत चुक्यौ है, समाज नै चालण में वा ठावकी भुमिका निभावै अर लगोलग चैतावै, आपां उणनै इतिहास केवां। अठै प्रस्तुत चयन इतिहास सूं जुड़ियोड़ी कवितावां रौ है।
यूं तो मनख की जिनगाणी की सांची मुगती मानवता की सेवा में छै। पण अेक ई जिनगाणी में समाज अर देस कै लेखै समरपण, पीढयां तांई वांकी अंधेरी गैल में उजास दैबा को कारज करै छै। समरपण को यो भाव अस्यां ई न्हं आ जावै, घणा जीवट को कारज छै। जिनगाणी की अबखाया नै आपणी
राजस्थान रौ भील आंदोलन भारतीय स्वाधीनता संग्राम रै इतिहास रौ अेक उपेक्षित पानौ। अेक भूली बिसरी घटना। पण अेक आदिवासी कौम जिण भांत संगठित होय’र निरंकुश सत्ता रौ मुकाबलौ कियौ, आ काबिले-तारीफ बात। मानगढ री भाखरी माथै गुरू गोविंद रै मेळै में सदीव रै ज्यूं
संसार री भासावां बोलियां रो सर्वेक्षण करणिया भासाविदां रो मानणो है कै आखै जगत मांय 7000 सूं बेसी बासावां बोलियां है, जिणां मांय सूं अेकलै अेसिया महाद्वीप मांय 2500 भासावां बोलियां है। संसार री भासावां रो अध्ययन करण आळी संस्था अेथनोलॉग (Ethnologue) मुजब
आ बात म्हनै घणी संजीदा अर अरथाऊ लागी के ‘अपरंच’ रौ अेक आवगौ अंक आठवैं दसक री राजस्थानी कविता– खासकर सन् 1971 में प्रकासित ‘राजस्थानी-अेक’ री कवितावां, उणरी भूमिका अर असर माथै केंद्रित राख पूरसल विचार करीजै। निस्चै ई औ विचार म्हनै राजस्थानी नुंवी कविता
अतीत री इतिहास जातरा में मौजूदा राजस्थान आपरी न्यारी-न्यारी रियासतां रै नांव सूं ओळखीजतो रह्यो है। घणी दफै राज-सत्तावां री अदळा-बदळी, सींवां री घटत-बधत अर दूजा इतिहास कारणां सूं आं रियासतां रा सरूप बदळता रह्या। प्रदेस रो उतराधो हलको जठै जांगळ नांव