मांड म्हनै घणी पसंद है
चन्द्राणी मुखर्जी गीत-संगीत—खासकर फिलमी संगीत री दुनियां रौ अेक सैंधौ-मैंधौ नांव है। ‘ओ रे सजनवा क्या होती है’ गीत सूं खुद री पिछांण बणावण आळी अर ‘मेरे मेहबूब शायद आज कुछ नाराज हैं मुझसे’ गीत सूं प्रसिद्धि अर लोकप्रियता रै सिखर पर पूगण आळी चंद्राणी मुखर्जी, वां इण्या-गिण्या गायक गायिकावां में सूं है, जका केई केई भासावां में फिलमी अर गैर-फिलमी गीत न्यारै-न्यारै ‘मूड’ अर न्यारी-न्यारी स्टाइल में गाया है।
चन्द्राणी मुखर्जी पाछला दिनां जद अेक कार्यक्रम रै सिलसिलै में जोधपुर आई तौ वां सूं ‘माणक’ रै सारू बात-बतळाव कीधी प्रकास पुरोहित।
प्रकास पुरोहित : चन्द्राणीजी, अेक गायिका होवण रै नातै कांईं आप आपरै प्रारम्भिक जीवण बाबत कीं बतास्यौ?
चन्द्राणी : वींया म्हैं मूळ रूप सूं बंगाली हूं, पण म्हारौ टाबरपणौ घणकरौक राजस्थान में ईं बीत्यौ। इण वास्तै म्हैं आज ई खुद नै ‘आधी राजस्थांनी’ मानूं। कारण औ के म्हारा पिता के. अेल. मुखर्जी जैपर में नमक आयुक्त रै पद माथै कांम किया करता। अर म्हारै टाबरपणै रा पांच-छ: कीमती बरस राजस्थान में ई बीत्या। पछै पिताजी री बदळी कलकत्ता होयगी अर म्हे कलकत्तै गया परा।
प्रकास पुरोहित : गायन रौ छेतर चुणबा रौ कांईं खास कारण बणियौ?
चन्द्राणी : म्हारी मां अंजली मुखर्जी अेक आछी गायिका ही। इण वास्तै टाबरपणै सूं ई म्हनै संगीत रौ वातावरण मिळियौ। अर म्हारी रुची इण तरफ होई।
प्रकास पुरोहित : तद तौ आप संगीत री बकायदा सिक्षा हासिल करी होसी?
चन्द्राणी : हां, जैपर में ई म्हैं गीत-संगीत री सरूपोत री सिक्षा लीधी। म्हारा पैला गुरू हा जीवनलालजी मटु। यूं मां सूं ई जाहिर-अजाहिर रूप सूं घणौ कीं सीख्यौ। कलकत्ता में ज्ञानप्रकासजी घोस सूं सीख्यौ।
प्रकास पुरोहित : उणरै पछै?
चन्द्राणी : उणरै पछै कांईं! आ यात्रा हौळै-हौळै आगै बढती गी। म्हैं सीखती रह्यी अर गावती रह्यी। हां, बंबोई आवण रै पछै म्हैं बड़ा गुलाम अली खां साब अर उस्ताद फयाज खां साब सूं दोय बरस तांईं सिक्षा पाई। अै दोनूं ईं सास्त्रीय संगीत रा प्रकाण्ड विद्वान अर विख्यात गायक हा।
प्रकास पुरोहित : गावण री दुनियां में पैलौ प्रवेस आपरौ कद होयौ?
चन्द्राणी : जैपर रेडियौ स्टेसण माथै म्हैं तीन बरस तांईं गीत गाया तद म्हारी ऊमर पांच बरस री ही। मतलब के पांच सूं आठ बरस री ऊमर तांईं म्हैं टाबरां रा गीत गाया।
प्रकास पुरोहित : पछै औ सिलसिलौ कीकर आगै बधियौ?
चन्द्राणी : कलकत्तै जावण रै पछै म्हैं केई बंगाली गीत गाया। अर केई स्टेज कार्यक्रम दिया। ग्यारा बरस री ऊमर में अेच. अेम. वी. म्हारा गायोड़ा गीतां रौ अेक ई. पी. रिकार्ड जारी कियौ। बारा बरस री ऊमर में म्हैं स्व. मोहम्मद रफी रै साथै अेक युगल गीत गायौ— ‘ये ठंडी हवायें।'
प्रकास पुरोहित : फिलमां में आवण रौ जोग-संजोग कीकर बणियौ?
चन्द्राणी : सगळा रौ सुझाव हौ के म्हैं आछौ गावूं, इण वास्तै म्हनै फिलमां में आवणौ चाहिजै। वां दिनां ई म्हनै रवीन्द्र जैन रै संगीत निरदेसण में फिलम ‘काच और हीरा’ में गावण रौ मौकौ मिळियौ। अर म्हारौ गायोड़ौ पैलौ गीत ‘नजर आती नहीं मंजिल’ खासौ लोकप्रिय रह्यौ। फेर तौ औ सिलसिलौ चालतौ ई गयौ। अर म्हैं फिलम 'प्यासी नदी', 'गृह प्रवेश', 'जुल्म की पुकार', 'जुदाई', 'बेरहम', 'पत्थर की लकीर', 'गोपाल कृष्ण' अर 'पायल की झंकार' इत्याद में गीत गाया। अब रिलीज होवण आळी म्हारी फिलमां में 'सौगात', 'खिलाड़ी', 'लाल चुनरिया' अर 'दूर देस' खास है। म्हैं लगभग स्सै आछा संगीत निदेसकां रै निरदेसण में गायौ है।
प्रकास पुरोहित : आप खुद री खास उपलब्धी कांईं मानौ?
चन्द्राणी : फिलम ‘कितने दूर कितने पास’ रै सारू गायोड़ै गीत ‘मेरे मेहबूब शायद आज कुछ नाराज है मुझसे’ रै वास्तै म्हनै केई पुरस्कार मिलिया। इणी भांत फिलम ‘पूनम’ रै गीत ‘महोब्बत रंग लायेगी’ नै ई लोगां खूब रैसपोन्स दियौ।
प्रकास पुरोहित : रिकॉर्डिंग री वेळा आप किण बात रौ खास ध्यांन राखौ?
चन्द्राणी : म्हैं गीत री सिचवेसन रौ खास ध्यांन राखूं, अर इण बात रौ ध्यांन राखूं के परदै माथै इणनै कुणसी अभिनेत्री गावैली।
प्रकास पुरोहित : फिलमां रै अलावा ई आप गीत गाया होसी?
चन्द्राणी : हां, म्हैं केई गैर फिलमी गीत गाया, जीयां भजन, गजल इत्याद। अर केई भासावां में गाया, जीयां राजस्थांनी, गुजराती, गढ़वाळी, मैथिली, भोजपुरी, पंजाबी, ब्रज, आसामी, उड़िया इत्याद में। बंगाली में तौ खैर केई फिलमी अर गैर फिलमी गीत गाया ई है। म्हैं म्हारा राजस्थांनी गीतां में विस्वविख्यात गिटार वादक श्री ब्रजभूसणजी काबरा रै संगीत निरदेसण में गायोड़ा ‘बनखंड री कोयल’ रा गीतां नै म्हारी कला जगत नै दिरीजी अणमोल धरोहर मानूं। इणी भांत भरत व्यास रा गीतां माथै ई म्हारी अेक ई.पी. रिकार्ड त्यार हुई है। अबार म्हैं कीं राजस्थांनी फिलमां सारू ई गीत गाया है, जीयां ‘सुहागण रौ सिणगार’ ‘गणगोर’ अर अेक अनाम फिलम।
प्रकास पुरोहित : गीतां में आप कुणसा गीतां नै खासतौर सूं पसंद करौ अर गीतां री कुणसी सैली आपनै विसेस रूप सूं दाय आवै?
चन्द्राणी : गजल, लोकगीत अर अर्द्ध सास्त्रीय संगीत म्हारी खास पसंद है। क्यूंके लताजी नै म्हैं म्हारा आदर्स अर गुरू मानूं। इण वास्तै म्हारी भी वा ई सैली है, जकी लताजी री है। हां, म्हैं ‘डिस्को’ नै पसंद कोनीं करूं, पण जे मजबूरी में गावणौ पड़ियौ, तौ गावूंली।
प्रकास पुरोहित : गावण में आप किण बात नै सिरै महत देवौ?
चन्द्राणी : म्हैं ‘धुन’ नै सबदां सूं ज्यादा महत देवूं।
प्रकास पुरोहित : जीवण में आपरौ मकसद कांईं है?
चन्द्राणी : गावण रै छेतर में नवा-नवा प्रयोग करणा अर लगातार ऊंचाई री तरफ बढणौ। अभिनय में म्हारी दिलचस्पी कोनी, इण वास्तै अभिनय करण रौ तौ सवाल ई कोनीं।
प्रसिद्ध संगीत निरदेसक बप्पी लहरी म्हारा जीजाजी है, पण म्हारौ अनुभव है के अठै बंगाली, बंगाली नै प्रोत्साहन कोनीं देवै। इक्कौ-दुक्कौ अपवाद होवै तौ दूजी बात है।
प्रकास पुरोहित : राजस्थांन रै बाबत आप कांईं कहस्यौ?
चन्द्राणी : राजस्थान म्हनै बेहद पसंद है। अठै रा लोगां री सादगी अर मेहमाननवाजी म्हनै घणी प्रभावित करै। आ धरती वीरता रै साथै साथै कला, साहित्य अर संस्कृती री धरती है। म्हनै राजस्थानी राग ‘मांड’ घणी पसंद है अर म्हैं इण राग में काफी गीत गाया है।