यो सलाम बी घाटा को

बण्यो देवतो भाटा को

समंदर का बौपार कठी

टोट्यो पड़ग्यो छांटा को

बरसां की तस, बीसर ग्यो

फरको मीठा खाटा को

कुण परोसतो जार्‌यो छै

सीरो बगड़्या आटा को

म्हारै भूंजो, पण थारै

नूंतो सैर-सपाटा को

जग की कथा और कांई

रासो चूमा चाटा को।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शांति भारद्वाज ‘राकेश’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक–18
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