पळींडै ऊपर ऊभो मरुवो।

बो नानी रै घर रो मरुवो॥

बात सुणावै बां बगतां री।

छोटा हा जद म्हे मरुवो॥

साफै री जद आंख मिची तो।

घर रै सागै रोयो मरुवो॥

मंडेरी जद कागो बोल्यो।

पाणी बिन ही भीज्यो मरुवो॥

बिरहा रा जद आंसू रोप्या

हाथ में म्हारै ऊग्यो मरुवो॥

ओळ्यूं रा अै सावण सजनी।

भीजै आंख्यां सूखो मरुवो॥

बाळपणै री बाखळ में बस।

कीकर-टाली अेक हो मरुवो॥

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत ,
  • सिरजक : सत्य पी. गंगानगर ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : जुलाई
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