आपनै देखियां हुया गैला

म्हे कित्ता मस्त हा पैलां-पैलां।

हुई जद रोसनी निगै आई

अै सूरज अस्त हा पैलां-पैलां।

वै आंख्यां है, कै इमरत री झारी

जिणां सूं त्रस्त हा पैलां-पैलां।

देखियां ऊकलै नहीं आखर

वाक दुरस्त हा पैलां-पैलां।

मुळक देख्यो उणां तो पग बंध ग्या

हौंसला पस्त हा पैलां-पैलां।

लाध ग्यो खजानो तो दोरा है

हा फाका मस्त हा पैलां-पैलां

जो वै आया, तो आब आई

म्हे लस्त-पस्त हा पैलां-पैलां।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : रामेश्वरदयाल श्रीमाली ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन, पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-19
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