आपनै देखियां हुया गैला
म्हे कित्ता मस्त हा पैलां-पैलां।
हुई जद रोसनी निगै आई
अै सूरज अस्त हा पैलां-पैलां।
वै आंख्यां है, कै इमरत री झारी
जिणां सूं त्रस्त हा पैलां-पैलां।
देखियां ऊकलै नहीं आखर
वाक दुरस्त हा पैलां-पैलां।
मुळक देख्यो उणां तो पग बंध ग्या
हौंसला पस्त हा पैलां-पैलां।
लाध ग्यो खजानो तो दोरा है
हा फाका मस्त हा पैलां-पैलां
जो वै आया, तो आब ई आई
म्हे लस्त-पस्त हा पैलां-पैलां।