समझ नी आवै अबै म्हैं कंई करूं

सगळा धणी है हाजरी किण री भरूं

मनख मोटा दिख रया चौफेर म्हारै

आप बतळावो उणी नै सिर धरूं

अेक नी सगळा सतावै रात दिन

थे बताओ किण घड़ी डूबूं तिरूं

हूं कुंवारी बायली सोवूं घणी

इण लुटेरां में केवौ किण नै वरूं

बंधुवा मजदूर सरसो बंगले में म्हैं खड़्यो

आप बोलो काम वारां आपरो किण रो करूं

हथियार ले माणस दसूं दिस है खड़्या

आप केवो किण दिसा निरभै चरूं।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : दीनदयाल ओझा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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