रात तो अेकलपणै री अेक गरदिस ही तो है
जिन्दगानी जातरा री अेक बंदिस ही तो है
आदमी सैं भी बडो बणनो कोई रो आदमी
तावड़ै में पड़छाईयां री अेक रंजिस ही तो है
हेत रै रिसतां में छोटो ओ बड़ो के भाई जी
मानखै सैं दूर होणो अेक साजिस ही तो है
चांदणी बेआबरू कर, चांद रो अपमान करणो
आदमी रै सोचरी या अेक माचिस ही तो है
कुछ उमीदां, चाहतां और रिश्तां री पूंजी साथ में
जिन्दगी वरना तो भाई अेक आतिस ही तो है।