सरकार का देखले मिजाज भायला
बैसाखियां सूं कर री है राज भायला
गीता, कुरान पै मरणो मारणो
शहर को होगो रिवाज भायला
अजन्ता, अलोरा री गळियां सूं हो
गुजरै आज सारो समाज भायला
विरासत में बुद्ध गांधी जो छोड्यो
डुबो दियो हमां वो जहाज भायला
जो ले ज्यांगा अगली सदी में देश नै
बै लंगड़ा र्या खुद आज भायला
टोपी री आड़ में भुलगा उणनै
जण पर म्हानै थो कदे नाज भायला
तस्वीर मेरै देश री है या गजल
महज नहीं है अलफाज भायला।
हँस के हुया कुर्बान अैं पै 'दीप'
वतन जद बी दे आवाज भायला।