अबलावां रो अपहरण, डाकुआं री आड़ में गेशू-गेशू, जुल्फां-जुल्फां मिली निजर तो म्हैं घबरायो न्यारी न्यारी सोच मिनख री सरकार का देखले मिजाज भायला थोथी रीत निभार्या लोग उगतो सूरज राम-राम सा