जीवण मांय पड़ाव मोकळा

मन में मीत तणाव मोकळा

सुख री फगत चावना लारै

जिंदगाणी भटकाव मोकळा

कठै-कठै इब मलम लगावां

तन मन लाग्या घाव मोकळा

अेक दिवो अर कितो अंधारो

सांपरतेक अभाव मोकळा

खुशियां रो तोहफौ सहरां नै

सिसकै है पण गांव मोकळा

पनप रह्या है हवळै-हवळै

छळछंदा रा दाव मोकळा

संगत रै फळ रा फळ आया

मिनखां में बदळाव मोकळा

उण सूं कदी नंईं बतळावै

राखै ओर लगाव मोकळा

लाल ऊंदरा बड़सी क्यां में

लारै पड़्या बिलाव मोकळा।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शंकर स्वामी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
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