राती बेळी धोळी अर कचनार बादळ्यां

धरती की चौपड़ में फरती सार बादळ्यां

गुडळ्या जळ सूं भरी तळायां झांकती

सावण में संवळायौ-सो सणगार बादळ्यां

रेत के टीबां की धरती सूं करै

श्योकड़ली महतारी कौ सो ब्वार बादळ्यां

ऊंचा-ऊंचा डूंगर कौ डर लागती

बरसै छै घाटी-घाटी कै द्वार बादळ्यां

उगतौ ढळतौ सूरज आंख्यां खाड़तौ

रोस खा’र बण जावै झट अंगार बादळ्यां

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थानी मासिक) ,
  • सिरजक : प्रेमजी प्रेम ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन ,
  • संस्करण : अगस्त 1986
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