प्रेमजी ‘प्रेम’
हाड़ौती रा सिरैनांव कवि-गीतकार।
हाड़ौती रा सिरैनांव कवि-गीतकार।
आंगण में उग आया थापा थूर बचता रीज्यौ
बचता रीज्यो
चांद की कोर, जे कतळ करगी
फुलबाड़यां की ज्यान छै, कानीर की कळ्यां
घणी गायी गजलां घणा गीत गाया
होबा द्यौ सरकार, ऊजाळौ होबा दयौ
जे अतना दन भी थोड़ा छै
जेता काळा बादळ जेतौ गोरौ जळ
केसर्या संझ्या गळी में खेलगी
खींच-ताण जोड़-तोड़ बार-बार क्यूं
फुलबाड़्यां की ज्यान छै, कनीर की कळ्यां
पूरा न्हं होबाळा कोल, गीत होग्या
राती बेळी धोळी अर कचनार बादळ्यां