केसर्‌या संझ्या गळी में खेलगी

सांवळौ दन ले’र अपणी गेल गी

चूकती चकव्यान का मन तोड़गी

गाळियां चकव्यान की सब झेलगी

अेक टेसण टापतौ रह गयौ

अेक धूंधाड़ौ फकाती रैल गी

हाय अणता हाय थारी भायल्यां

अेक गी सांगोद अेक पचेलगी

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थानी मासिक) ,
  • सिरजक : प्रेमजी प्रेम ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन ,
  • संस्करण : अगस्त 1986
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