कै नै फुरसत है, कुण आवैगो

तेरो हौंसलो ही थारै काम आवैगो

दूसरां रै बागां रा फूल मत देख

थारो बगीचो ही थारै काम आवैगो

चांद-सूरज सै उम्मीदां मत राख

थारो दिवलो ही थारै काम आवैगो

जिंदड़ी रै सारा रिसतां में थारै

हेत रो रिसतो ही मन खिलावैगो

जे बगीचां में मधुकर आयो

तो, फूलां पर कुण गुण गुणावैगो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मधुकर गौड़ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
जुड़्योड़ा विसै