घणी गायी गजलां घणा गीत गाया

कदी वै दीख्या कदी वै आया

जरा-सी झलक सूं कश्यां धाप ज्यागा

पलक का पपैया जनम सूं तसाया

जुगां तांई ज्यांनै सदा अपणा मान्या

कश्यां आज वांनै पराया बताया

रंगीली नजर सूं अश्यां थांनै देख्या

हज्यारा का क्यारा घमंड में माया

बछटतां-बछटतां ढुळ्या अतना आंसू

के आंगण में मोत्यां का बड़ला उग्याया

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थानी मासिक) ,
  • सिरजक : प्रेमजी प्रेम ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन ,
  • संस्करण : अगस्त 1986
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