राती बेळी धोळी अर कचनार बादळ्यां
धरती की चौपड़ में फरती सार बादळ्यां
गुडळ्या जळ सूं भरी तळायां झांकती
सावण में संवळायौ-सो सणगार बादळ्यां
रेत के टीबां की धरती सूं करै
श्योकड़ली महतारी कौ सो ब्वार बादळ्यां
ऊंचा-ऊंचा डूंगर कौ डर लागती
बरसै छै घाटी-घाटी कै द्वार बादळ्यां
उगतौ ढळतौ सूरज आंख्यां खाड़तौ
रोस खा’र बण जावै झट अंगार बादळ्यां