धिंगाणै धणियाप, झूठी धाक क्यूं करै।

जहर, इमरत में घुळै, इसी बात क्यूं करै॥

सोरो संसार, राम गृहस्थ में रमै।

खार, बैर बांधणै रो, बवाळ क्यूं करै॥

देस-प्रेम, फिकर-जिकर, मन में बसै।

देस नै बांटण री, तूं झिकाळ क्यूं करै॥

मांग्या आवै माल, ज्यांरै कांई कमी लाल।

बै मेहनत-मजूरी, हीड़ो-काम क्यूं करै॥

‘श्याम’ थांरी लीला नै तूं ही जाणै।

नहीं बस री जो बात, तो विचार क्यूं करै॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : राधेश्याम जोशी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-33
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