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अंजस सोशल मीडिया
राधेश्याम जोशी
जलम: 1945
सम्पूर्ण
कविता
2
ग़ज़ल
2
राधेश्याम जोशी री ग़ज़ल
धिंगाणै धणियाप, झूठी धाक क्यूं करै
मत होवै तूं डफांचूक, थारै क्यूं बापरगी भूक