म्हारै भावै रोटी खाव

खावै या भूखी सो जाव

राती राती आँख करै क्यूं

थनै क्यूं आवै है ताव

म्हैं तो रह्यो किनारै ऊभो

थारै कारण डूबी नाव

इणी गांव में खेल्यो खायौ

छोड़ किंयां द्यूं अपणौ गांव

दरद हुवै थारी पीड़ा सूं

राखूं थां सूं घणूं लगाव

पख तिंवारां रौ मौसम है

गुस्सौ थूक’र कनै आव

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मनोहरलाल गोयल ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
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