है साची बात कुदरती।
अै मांगै थांसूं धरती॥
नहीं साथ किणी रै जावै।
मरतां लारै रैय जावे।
क्यूं दुनिया देती डरती।
अै मांगै थांसूं धरती॥
अै धरती सब री माता।
उपजावै म्हांरै शांति।
कुछ जोर जुलम नीं करती।
अै मांगै थांसूं धरती॥
खुद खेत जोत नहीं पावै।
पण दूजां नै तरसावै।
आ बेजां बात अखरती।
अै मांगै थांसूं धरती॥
जो समझायां नहीं देसी।
कोई खोस जोर सूं लेसी।
आखर में बात बिगड़ती।
अै मांगै थांसूं धरती॥
पड़तल नै काम लगावै।
वा घास फूस उपजावे।
नीं रैवै गायां चरती
अै मांगै थांसूं धरती॥
बिन धरती वाळो पावै।
वो जोत कमावे खावै।
उणरी काया है ठरती।
अै मांगै थांसूं धरती॥
बदळाव होतो आयो।
काल धूप आज है छाया।
नहीं होण वाळी वाली टरती।
अै मांगै थांसूं धरती॥
आ विनोबा री टोळी।
धरती हित मांडी झोळी।
यूं मोटी हो गई भरती।
अै मांगै थांसूं धरती॥
थे राजी राजी दे दो।
देवण रो लाहो ले ली।
क्यूं खोसै भूखां मरती।
अै मांगै थांसूं धरती॥
नहीं ठेस किणी रे आवै।
धीरज 'श्री' धरती पावे।
सर्वोदय वाद कुदरती।
अै मांगै थांसूं धरती॥