पौढ़ पालणै बाला बेटा करता पोळ रुखाळी जी।
पालणियां कै ऊपर ढक दी पलक जरी की जाळी जी।
अरै पालणा मधरो-मधरो हाल।
कै सोइजा रै कान कुंवर गोपाल।
लाल अब सोइजा रै॥
ताल सुरां पर इकतारा पर रमणी राग उगेरी जी।
नार लुवातण लालरिया पर मीठी लोरी टेरी जी।
अरै पालणा मधरो-मधरो हाल।
कै सोइजा रै कान कुंवर गोपाल।
लाल अब सोइजा रै॥
चमक नींद में सोवै-जागै झुण झुणिया री तानां में।
चड़ी चुड़कला आंगण चुगता अमरत घोळै कानां में।
पालणियां में पळता-पळता दूधां-पूतां धानां में।
चांदड़लै पर चिलको नांकै, सूरज झांकै छानां में।
चांद-सूरज कै गाल मंडाइदूं काजळ-टीकी काळी जी।
करूं टोटक्या असी-उसी की खोटी नजर्यां टाळी जी।
अरै पालणा मधरो-मधरो हाल।
कै सोइजा रै कान कुंवर गोपाल।
लाल अब सोइजा रै॥
ऊपर मेड़ी घल्यो पालणो, केसर डोरी झूलै तो।
धोळी डोरी सांमी साळां सात संरंग नै छळै तो।
खेत मेर पालणो डोर में हरियाळी रंग फेलै तो।
तीन बांस पर तीन रंग की, झालर झुम्मक झूलै तो।
हिंदवाणी को अेक हींदणो, हाल्यो अेक हजारी जी।
लाल हठीला हालरिया पर जांमण हरखी हारी जी।
अरै पालणा मधरो-मधरो हाल।
कै सोइजा रै कान कुंवर गोपाल।
लाल अब सोइजा रै॥
अजी जनावर जूंण जनम भर, देख पालणा सेवै छै।
मां की ममता का मीत-गीतड़ा, सुणो घोंसळा गेवै छै।
सुत सारू सकंट कतरा, जगती में जामण्यां सहवै छै।
अठी झाटको मां रै लारै, उठी लोरियां लेवै छै।
जतरो हाल पालणो उतरो गुणित काळजो हरख्यो जी।
मात जसोदा नजर-नसा में, कान कुंवर नै नरख्यो जी।
अरै पालणा मधरो-मधरो हाल।
कै सोइजा रै कान कुंवर गोपाल।
लाल अब सोइजा रै॥
जननी है तो अेक जणाइजे, अेक जणाइजे लाखां में।
मांयड़ खुरल्या भरदे टाबर, खावै काजू-दाखां में।
अतरो खावै अतरो पीवै जतरो च्हावै चाखां में।
बेट्यां बाबल गोदी खेलै, बेटा आंचल मां का में।
सुत सिंणगाइगी कतरी बार लाल जै वा निरखाइगी जी।
लिया वारणा उतरा झोटा लार लार गिणवाइगी जी।
अरै पालणा मधरो-मधरो हाल।
कै सोइजा रै कान कुंवर गोपाल।
लाल अब सोइजा रै॥