रात चानणी चांदड़लो गिगनार घुमेरा खावै।

किरत्यां छम-छम नाचै-गावै नींदड़ली कद आवै॥

तारा टीकी, माथै मंडग्या रातड़ली मुस्कावै।

सरद किरण री अंगड़ाई में थिरक-थिरक मन गावै॥

दूर-दूर धोरां पर सुणल्यो अळगोजो गरणावै।

तेजो टेर सुणावै कोई धण बैठी बतळावै॥

मिलण प्रीत री वेळा मुळकै आभो रूप सजावै।

किरत्यां छम-छम नाचै-गावै नींदड़ली कद आवै॥

हिवड़ै में उजास जागै रे रात दूधिया धोळी।

सरवरियै में लहरां सागै बायर करै ठिठोळी॥

सुपन सुरीला इसी रात में रूपाळा बण जावै।

किरत्यां छम-छम नाचै-गावै नींदड़ली कद आवै॥

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : धनंजय वर्मा ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
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