कुरजां कुरळाई आधी रात
भंवर कौ न्हं साथ
चौबारौ सूनौ
डर लागै
निंदिया कोसां दूर उडी छै,
साजनियां कै गांव क्यूं बैरण नै जाण-बूझकै
ताजा कर दिया घाव
तकिया पै कोई धरकै हाथ,
चौबारौ सूनौ डर लागै
तड़कै म्हारी सालगिरह छै, पांवणिया आजाह
दरपण में सणगारी देखै, चांदणिया भाजाह
दीया सूं करबा बैठी बात,
चौबारौ सूनौ डर लागै
विरहण आग लगावै दूणी, यो पूनम कौ चांद
पाती ही आ जाती वां की, सैली पड़ती याद
नैणां की थमती तो बरसात,
चौबारौ सूनौ डर लागै
चड़ी-चुड़गला छाना-मूना, सोया नीड़ां में है
सेजां पै म्हूं ले’र कलौटां, तड़पूं पीड़ा में है
न्हं जाणै कद होसी परभात,
चौबारौ सूनौ डर लागै