कीं सोचां अर कीं कर जावां

थैं बोलो तो म्हैं मर जावां

कांईx तोल कठै रम र्‌या छो

कस्या देश थैं जा’र बस्या छो

अस्यां बाट मं आंख्यां ऊबी

अम्बर ताकै जस्यां चकोरी

दै’र अंधेरी सावण बरसै

अजब फकर मं हिवड़ौ धड़कै

कांईं बतावां बादळ मं जद

बिजळी चमकै म्हैं डर जावां

कीं सोचां अर कीं कर जावां

थैं बोलो तो म्हैं मर जावां

सख्यां-सहेल्यां री अठखेल्यां

बातां असी जस्यां पहेल्यां

बागां बैरण कोयल बोलै

थां की याद काळज्यौ छोलै

बैठ पपइयौ डाळां-डाळां

पीव-पीव री बोलै बोल्यां

अर म्हैं जस्यां मिरग कस्तूरी

पोळ माइनै फर-फर जाबां

कीं सोचां अर कीं कर जावां

थैं बोलो तो म्हैं मर जावां।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : पुरुषोत्तम ‘यकीन’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक–18
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