धरती रो धन धरती माता रै अरपण करबो जाणा छां।

दुसमण रा लोई काळी रो खप्पर भरबो जाणा छां॥

सीधा सूं सीधा बांका सूं बांकपणो करबा वाळा म्हां।

अेक सूई री नोक बराबर धरती पर मरबो जाणा छां॥

फागण रा रंगां में खूनी होळी म्हां भरबो जाणा छां।

सांवणियां रा गीत सुरां में शंखनाद भरबो जाणा छां॥

अन्नपाणी तो दूर घास की रोटी खाबा वाळा छां म्हां।

सुख में बणा बिहारी संकट में भूषण बणबो जाणा छां॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : ब्रजमोहन सपूत ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 23
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