म्हारा गीत हियै रा मीठा बोल है

मूंगा मोती सूं मुहंगा अनमोल है

अै दुख-सुख रा संगी साथी, सांचो सगपत साथ निभाय

म्हारा गीत सुणावै कोयल डाळ पै

पंछी-पंछी गावै ताळ-तमाळ पै

लहर-लहर दुहराहै सरवर पाळ पै

पत्तो-पत्तो नाचै इणरी ताळ पै

म्हारा गीतां में रस री रमझोळ है

बांसड़ली री धुन बिछियां रा बोल है

छणमण-छणमण छांटड़ल्यां री छोळ है

पंछीड़ां री प्यारी केळ-किलोळ है

झरमर बरसै खील-बतासा जद सावणियो झड़ी लगाय

भर-भर गीतां रा आंदळिया, टाबर खांड-खोपरा खाय

म्हारा गीत हियै रा मीठा बोल है

पावस काळ चढ़ै जीतण संसार नै

दळ-बादळ ले घेर नवेली नार नै

पुरवा बाजै इन्दर गाजै बारणै

मनमथ सूंतै बीजळ री तलवार नै

नार नवोढ़ा नीठ संभाळै जोबन

नैणा झरती बिरहण झूरै पीव नै

डूंगी टोकां गाज टहूकै मोर है

काळजियो कोरै पपिहो अर चकोर है

काळी कांठळ रातां कांमण, कळपै-तळपै जीव लुकाय

म्हारा गीत कुरझ रा बचिया, रात्यूं विरहण संग कुरळाय

म्हारा गीत हियै रा मीठा बोल है

चटक चानणी रात उनींदी जाग में

गीत मुळकै मीठी मारू राग में

चंग बजाता रंगरंगीला फाग में

उळझै गीतड़ला केसरिया पाग में

गीत फूटिया कीकर-कीकर कैर है

गीतां गूंजै रंग रो आखो डैर है

गीतां घुळती गींदड़ री घमरोळ है

गीत धमाळां घुरै घींग धपधोळ है

रसियो मनचींती गोरी रै गालां गीत-गुलाल लगाय

रंग री झारी, भर पिचकारी, गोरी तक-तक तीर चलाय

म्हारा गीत बिछड़्या-रूठ्या सजण-स्नेहियां मेळ मिलाय

म्हारा गीत हियै रा मीठा बोल है।

इण गीतां नै खुद जिनगाणी गाती जाय

सैसवरी नटखट नादानी गाती जाय

ओघट जीवट भरी जवानी गाती जाय

हर पीढ़ी के नुंई पुराणी गाती जाय

किरण उगाळी उठ, परभाती गाती जाय

दिनथ्यां करती संझ्या-बाती गाती जाय

भरै तावड़ै मीनत करती गाती जाय

पिंडल्यां पांणी पाणत करती गाती जाय

गीतां गूंजै पिणघट कुआ बावड़ी

दोघड़ ल्याती गाती आवै डावड़ी

इण गीतां में हरजस है हरबोल है

इण गीतां गोबिन्दो लीन्यूं मोल है

सांझ पड़्या जद गोळ बावड़ै, जद गायां नै बच्छ रंभाय

गीत-गुआळ गुदळ गोधूळी, गाडी गेलै गुड़ता जाय

म्हारा गीत हियै रा मीठा बोल है

इण गीतां नै नर कामेती गाता जाय

हरख-हरख माणस मानेती गाता जाय

हारावळ सूरा आगेती गात जाय

नेहो जन साईन्यां सेती गाता जाय

जद इण गीतां नै गावै मरदानगी

देखो परजळतै पोरख री बागनी

करम रेख पर मेख मानवी ठोक दे

जोर-जुल्म री जबर बाढ नै रोक दे

इण गीतां नै प्यासो मिनख पुकारले

अपणा बिगड़्या रूठ्या भाग संवार ले

धूळ भरी इण धरती नै सिणगार ले

म्हारा गीतां में इमरत री धार है

सेसनाग री गरळ भरी फूंकार

सन्ता री मुद्रा, सुरां री सेळ है

जौहर री झळ, बळती रो नारेळ है

अै सतियां रो गौरव भाखै, सूरां जस रो मोड़ बंधाय

दीन दुखी रा आंसू पूछै, अै अनवी री नाड़ नवाय

अै गाफल नै चेत करावै, अै घायल नै धीर बंधाय

म्हारा गीत हियै रा मीठा बोल है।

स्रोत
  • पोथी : जागती-जोत ,
  • सिरजक : मदनगोपाल शर्मा ,
  • संपादक : कन्हैयालाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : सितम्बर, अंक 07
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