हाथ हथेळयां की मेहन्दी में
च्यारूं वेद उघड़र्या
डील उपरै कस्या सबाका पै
नीलम सा जड़र्या।
बीन्दो जाणै उगतो सूरज
मांग भौर की लाली
दनभर नखरा कर'र न थाकी
दर्पण आगै नखराळी।
खाली दर्पण मं तन देख्यो
वाट सज्जन जोवै मन
कोरो खड़ज्या बरी बण
यो करवा चोथ को दन।
बिना डोर धनवां सा भंवरा
नैण माछळी ज्यूं तड़पै
घूंघट में सूरज मुळकै
जोबन काया नै तळपै।
दांयो कान्धो पकड़ नागणी
कळश बजोरा पै लूमै
भरै डील पर फळबेटा
कमर कणकती नै चूमै।
बोल-बोल में भोडळ बिखरै
जी सूं दमकै सारो तन
कोरो खड़ज्या बरी बण
यो करवा चौथ को दन।