सात रंग रा घोड़ा इण रा

सात सुरां री तान भर

नींदड़ली उचटा गयो

तारां छाई रात में सूरज रो रथ गयो।

रंग-रंगीलो छैल-छबीलो

चमकीलो-सो चटकीलो-सो

हंसतो गातो टेर लगातो

सामी म्हारै बैठ कै तंबूरो बजा गयो।

नांव बतातो गांव बतातो

गज़ल सुणातो गीत सुणातो

मन री सगळी बात बतातो

गीतां रो बावळियो बण कै मधरा गीत सुणा गयो।

नैंणां री बोली बतळातो

हियै प्रीत री हूक जगातो

भंवरै ज्यूं घिर-घिर नै आतो

कुतर-कुतर काळजियो बैरी मनड़ै नै बिलमा गयो।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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