सुत मरियौ हित देस रै, हरख्यौ बंधु-समाज।

मा नहँ हरखी जनम-दिन, जतरी हरखी आज॥

कोई वीर अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान हो गया, यह देखकर उसका बान्धव-समाज बहुत ही प्रसन्न हुआ और उसकी माता को तो आज पुत्र-वध पर इतना हर्ष हुआ जितना पुत्र-जन्म पर भी नहीं। इसका कारण यह हैं कि बांधवों को तो केवल देश-चिंता ही थी किंतु माता को तो देश-चिंता और उससे भी बढकर अपने स्तन-पान की चिंता थी।वे दोनों ही आज पूरी हुईं।

स्रोत
  • पोथी : महियारिया सतसई (वीर सतसई) ,
  • सिरजक : नाथूसिंह महियारिया ,
  • संपादक : मोहनसिंह ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रन्थागार, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै