सायर जे थूं सांचलौ, परकिरती परणाय।

धरती साथै मेघ रौ, हथळेवौ करवाय॥

छोटी-मोटी टेकर्‌यां, उभर्‌या जियां उरोज।

जोबन भर्‌यौ जमीनड़ी, रग-रग नाचै रोज॥

बादळ खातर बावळी, बणी मरुधरा धूळ।

उडी फिरै आकासड़ै, भौमी चढ़ी भतूळ॥

तपी तवै ज्यूं तापसी, बिरह-वेदना भौम।

बादळ चल्यौ बिदेस सूं, फाटण लाग्या रोम॥

बाजां-गाजां बादळौ, अंबर अस असवार।

ढूकण आयौ बींद बण, ढोलां री ढमकार॥

बायर बग्घी बैठ नै, धनुख बाण कर धार।

बादल ब्यावण चालियौ, मरुधरा रौ यार॥

बायर-ब्याणा बापरी, बादळियां बारात।

उबटण मसळ्यौ आंधड़ी, मरूधरा रै गात॥

परूवा नाई पुगियौ, इण संदेसै साथ।

ब्यावण खातर मरूधरा, बारै खड़ी बरात॥

गिगन झबाका मारियौ, सजियौ सांगोपांग।

बादळ भरबा चालियौ, मरूधरा री मांग॥

अण घण बाजा बाजिया, बीजळ रै परकास।

आभै मण्डप मरूधरा, मुळकै बादल पास॥

आभै आतिसबाजियां, बादळ बणियौ बीन।

मरूधरा मन माचळ्यौ, ताव अेक सौ तीन॥

नाचै नरतक मोरिया, गावै डेडर-डूम।

बादळ मद में बावळो, रियौ मरू मुख चूम॥

छिपतै सूर रतीजगौ, मैंदी मेघै हाथ।

भूंड पधार्‌या भातवी, डिंगुर गावै भात॥

जुगनू हाथां च्यानणौ, जीमण चली बरात।

भरग्यो मरूधर आंगणौ, पतंग बरात्यां रात॥

पढ़िया पछुवा-पांडियै, फेरां रां सरलोक।

पिव-बादल रै पांवडां, मरूधर मारी धोक॥

होय सुहागण मरूधरां, हरियल चूड़ौ पैर।

बादल साथै सोयगी, ही मालक री मैर॥

बूढ़ी माई बिदली, चिलकै मरुधर माथ।

सावण चाली सासरै, मेघ साजना साथ।॥

बादळ आयौ बारणै, मरुधर कुंटौ खोल।

बांथा भरले बावळी, चूक जुदाई मोल॥

बादळ बरसां बावड़्यौ, ल्यायौ हरियल सूट।

मुळक पहरियौ मरुधरा, हरख कोंपळा फूट॥

पून सुणावै गीतड़ा, गिगन बजावै चंग।

मरूधर साथै बादळौ, खेलण लाग्यौ रंग॥

मुळकै मरुधर बीनणी, बर बादळ नै देख।

रळ-मिळ दोनूं मांडसी, हरी कलम सूं लेख॥

बादळ-बायां आयनै, कवै मरुधरा मोद।

बलिहारी म्हैं बालमा! हरियल करदी गोद॥

जच्चा ज्यूं सोई जमीं, मूंडै बूक लगाय।

कैवै पिव पयोध नै, पाणीड़ौ तो प्याय॥

मरुधर माग्यौ मोरचौ, आज पकड़ियौ चोर।

घाल कड़्यां में पोमचौ, लगी मचावण। सोर॥

झड़-झड़ पड़िया झांखड़ै, झाड़-झड़ूला पान।

मरुधर बन्नी नै जियां, बिरछ भरायौ बान॥

आभै चिमकै बीजळी, ज्यूं सोनै रौ तार।

मानो! मरुधर वासतै, गैणो घड़ै सुनार॥

छीदी-छीदी छांटड़ी, दूणी ल्याई आग।

मरुधर मूंडै मांडगी, ज्यूं चेचक रा दाग॥

जोगण बणगी मरुधरा, बादळ गयौ बिदेस।

हरियल चूनर फैंकनै, धार्‌यौ भगवौं भेस॥

मरण लागरी मरुधरा, बादळ! बेगौ पूग।

ऊग्यौ के आकासड़ै, बींरी छाती ऊग॥

पछिमरौ पावणौ, पाणीदार पयोध।

परणी-पीहर पूगसी, हरियल करसी गोद॥

डूंगर कट-कट मेह सूं, कीकर बणिया देख।

मरुधरा री आंखड़ल्यां, ज्यूं काजळ री रेख॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : रामस्वरूप किसान ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-17
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