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कर माहैं माला फिरै
बखना जी
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कर
माहैं
माला
फिरै,
जीभ
फिरै
मुख
मांहि।
मन
फिरै
ठाहर
घणी,
‘बखना’
सुमिरण
नांहि॥
स्रोत
पोथी
: बखना जी की वाणी
,
संपादक
: मंगलदास स्वामी
,
प्रकाशक
: लक्ष्मीराम ट्रस्ट, जयपुर
,
संस्करण
: प्रथम
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